Wednesday, May 23, 2012

टेस्ट ट्यूब बेबी और किराये की कोख नाजायज


इस्लाम में कृत्रिम गर्भाधान (आर्टिफिशियल इन्सेमनैशन) के जरिये संतान सुख प्राप्त करना और किराये की कोख (सरोगेसी) का सहारा लेना नाजायज है। यह कहना है प्रमुख इस्लामी संस्था बरेली मरकज का। बरेली मरकज के दारूल इफ्ता ने एक सवाल के जवाब में फतवा जारी कर मुसलमानों को कृत्रिम गर्भाधान और किराये की कोख से बचने की सलाह दी है। बरेली मरकज बरेलवी मुसलमानों की सबसे बड़ी संस्था है। फतवे के अनुसार, इस्लाम में अप्राकृतिक ढंग से संतान सुख पाने की मनाही है। इंसानी रवायत में जो तरीके हैं, वे ही सही हैं। टेस्ट-ट्यूब बेबी अथवा कृत्रिम गर्भाधान तथा सरोगेट मदर की बात नाजायज है।दरअसल एक युवक ने पूछा था, अगर कोई मुस्लिम दंपति किसी कारण से संतान सुख की प्राप्ति नहीं कर पा रहा है और वे बच्चा भी गोद नहीं लेना चाहते तो क्या वे कृत्रिम गर्भाधान का सहारा ले सकते हैं।? सरोगेट मदर का सहारा लेना कितना जायज है? कृत्रिम गर्भाधान का सहारा अमूमन वे दंपति लेते हैं, जिनमें किसी तरह का शारीरिक विकार होता है। कभी-कभी अकेले रहने वाली महिलाएं भी संतान सुख के लिए किसी डोनर के वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान का सहारा लेती हैं। किराये की कोख लेने का चलन भी इन दिनों तेजी से बढ़ा है। फतवे के बारे में दारूल इफ्ता के प्रमुख मुफ्ती कफील अहमद ने कहा, हम मुसलमानों से यह कहना चाहेंगे कि वे किसी भी सूरत में कृत्रिम गर्भाधान का सहारा न लें। इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता। किराये की कोख लेने की भी इजाजत हमारे मजहब में नहीं दी गई है