Sunday, May 1, 2011

बुर्का का सवाल


भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के मेरे कई मुसलमान दोस्तों में से एक भी ऐसा नहीं है जिनके घर में महिलाएं मुंह ढंकने के लिए बुर्का पहनती हों। अब पाकिस्तान के मेरे मिलने वाले बताते हैं कि दस साल पहले की बजाय आज बुर्का पहने औरतें ज्यादा तादाद में दिखाई देती हैं। यह ज्यादातर धार्मिक कट्टरता के उभरने और तालिबान के बढ़ते असर की वजह से है। मेरे लिए यह आघात जैसा है, क्योंकि मैं औरतों के बुर्का पहनने की जहालत समझता हूं। इससे मुसलमान औरतें नौकरी या कामधंधा करने से वंचित रह जाती हैं और अपने ही घर में कैद हो जाती हैं। बुर्का पहनने वाली औरतों के एक उल्लेखनीय चैंपियन डॉ. जाकिर नायक हैं। बुर्का पहनने के उनके तर्क पर मुझे हंसी आती है। उनका कहना है कि मान लो तीन औरतें चहलकदमी कर रही हैं। दो ने बुर्का पहना है और एक ने नहीं। अगर वह सड़कछाप मजनुओं के गैंग के सामने से गुजरती हैं तो वह किसके साथ छेड़खानी करेंगे? जाहिर है जिसने बुर्का नहीं पहना है उससे, क्योंकि वह उसका चेहरा देख सकते हैं बाकी दो का नहीं। इस तरह बुर्के से सुरक्षा मिलती है। अगर आप मामले पर जरा गंभीरता से गौर करें तो आप पाएंगे कि बुर्के ज्यादातर निम्न मध्यम वर्ग की औरतें पहनती हैं। उच्च वर्ग की महिलाएं शिक्षित और पश्चिमी शैली में रहती हैं। सबसे निचला वर्ग खासतौर से जो खेतीबाड़ी में लगा है वह अपने मर्दो के साथ रहती हैं और बुर्का नहीं पहनतीं। केवल निम्न वर्ग की औरतें अपने आप को बुर्के से आजाद नहीं करना चाहती, क्योंकि वह ऐसा करने की स्थिति में नहीं हैं। मुझे उम्मीद थी कि दार-उल-उलूम हिजाब खत्म करने के पक्ष में फतवा जारी करेगा, लेकिन शायद ही संभव हो सके। मुझे यह भी उम्मीद थी कि कैरो में अल अजहर फ्रेंच सरकार के समर्थन में कुछ कहेंगे। जिसने बुर्का पहनने को दंडनीय अपराध करार दिया है। फ्रांस में किसी भी दूसरे यूरोपियन देश से ज्यादा मुसलमान रहते हैं। उनमें से ज्यादातर पुरानी कालोनियां हैं। हिजाब अपराध नहीं है, लेकिन उससे चिढ़ होती है। इस चिढ़ को हटाने के लिए दूसरे तरीके खोजने चाहिए। मुझे तुर्की के अतातुर्क कमाल पाशा की याद आती है जिसने एक ही झटके में ऐसी संस्थाओं को खत्म कर दिया था जो वक्त के साथ नहीं चल रही थीं। उन्होंने खलीफागिरी को समाप्त किया और भारत के खिलाफत आंदोलन की हवा निकाल दी। गांधी ने भारतीय मुसलमानों का समर्थन हासिल करने की उम्मीद में खिलाफत आंदोलन का समर्थन किया था और इसमें वह असफल रहे। कमाल पाशा ने बुर्का पहनने पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। यही वजह है कि तुर्की आज दुनिया का सबसे आधुनिक मुस्लिम देश है। हमें एक और कमाल पाशा चाहिए। हवा खारिज करना : सबके बीच जोर से हवा खारिज करने को ठीक ही गलत समझा जाता है और इसे अशिष्टता माना जाता है। बुरी बात यह है कि वह खराब आदत केवल मर्दो में पाई जाती है। मुझे एक भी ऐसी महिला नहीं मिली जो सबके सामने हवा खारिज करती हो। मेरा सबसे ज्यादा यादगार अनुभव 50 साल पहले हुआ जब मैं काबुल में एक काम के सिलसिले में गया था। मेरे साथ एक सुप्रसिद्ध फोटोग्राफर थे। शहर में केवल एक ही होटल मिला और हम दोनों को एक कमरे में रहना पड़ा। यह शर्मा बंधु पक्के शाकाहारी थे और दाल या सब्जी के सथ पुलाव तक नहीं खाते थे, लेकिन दूसरी रात को शर्मा का पेट गुब्बारे की तरह फूल गया। मैंने जैसे ही बत्ती बुझाई उन्होंने बम फोड़ने शुरू कर दिए। मैंने कहा भगवान के लिए यह बंद करो, लेकिन इसकी बजाय उसने मुझे लंबा भाषण दे दिया (लेखक वरिष्ठ स्तंभकार हैं)


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