मदरसों को शिक्षा के अधिकार (आरटीइ) कानून के तहत लाए जाने को लेकर परस्पर विरोधाभासी बयानों से खफा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्र सरकार को रमजान के बाद आंदोलन की धमकी दी है। पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य जफरयाब जिलानी ने सोमवार को कहा कि एक ओर केंद्र कह रहा है कि मदरसा और अन्य धार्मिक संगठनों को आरटीइ एक्ट से के दायरे से बाहर रहेंगे, लेकिन कानून में साफ तौर पर कहा गया है कि मदरसे स्कूल के दायरे में ही आएंगे यानी उन पर यह अधिनियम लागू होगा। जिलानी ने कहा कि मदरसों को नोटिस देकर कहा गया है कि वे छह कमरों, खेल के मैदान, लाइब्रेरी जैसे मानक पूरे करें। तीन साल के भीतर ऐसा न करने पर मदरसों या अन्य पर जुर्माना या उन्हें बंद करने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि बोर्ड की अक्टूबर या नवंबर में होने वाली बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि आरटीई एक्ट की धारा 8 और 9 पाठ्यक्रम में बदलाव का अधिकार भी मदरसों से छीनकर केंद्र या स्थानीय संस्थाओं को देने की बात कही गई है। जिलानी ने आरोप लगाया कि मदरसों की प्रबंधन कमेटी में अल्पसंख्यक समुदाय के एक सदस्य को नियुक्त करने का अधिकार भी उनसे छीन लिया गया है।
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