Monday, August 1, 2011

बंगाल में बढ़ेगा मुस्लिम कोटा


कोलकाता मां-माटी-मानुष के नारे के बल पर पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज हुई ममता बनर्जी अब खुद को अल्पसंख्यकों का हमदर्द साबित करने में जुट गईं हैं। उन्होंने एलान किया है कि तृणमूल सरकार अल्पसंख्यकों के विकास और उन्हें उनका वाजिब हक देने के लिए प्रतिबद्ध है। अल्पसंख्यकों को आरक्षण देने और उनके विकास के लिए विधानसभा में तीन माह के भीतर बिल पेश किया जाएगा। ममता ने अल्पसंख्यकों से जुड़े विशेष प्रावधानों की सच्चर समिति की सिफारिशों को लागू के लिए न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) राजेंद्र सच्चर के साथ चर्चा की। उन्होंने अल्पसंख्यकों को 82 करोड़ रुपये ऋण देने और 122 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति के अलावा 7.5 लाख अल्पसंख्यक छात्रों के लिए शिक्षा ऋण देने की भी घोषणा की। ममता ने अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में 7200 आंगनवाड़ी केंद्रों और इंदिरा आवास योजना के तहत 37,300 मकानों के भी निर्माण की घोषणा की। ममता बनर्जी ने शनिवार को यहां अल्पसंख्यक विकास व वित्त निगम द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा, पूर्ववर्ती वाम मोर्चा सरकार ने अपने लंबे शासनकाल में मुस्लिमों को गुमराह करते हुए हर क्षेत्र में विकास से वंचित रखा। गत वर्ष विस चुनाव के कुछ पहले फरवरी माह में तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने रंगनाथ मिश्र आयोग की सिफारिशों के आधार पर ओबीसी कोटे के तहत मुस्लिमों को सरकारी नौकरियों में दस प्रतिशत आरक्षण का लालच दिया था, वह छलावा था। वामो द्वारा तैयार बिल के मसौदे को भ्रामक करार देते हुए उन्होंने पिछली वाममोर्चा सरकार ने रंगनाथ मिश्रा आयोग की सिफारिशों के आधार पर आर्थिक रूप से पिछड़े मुसलमानों को लाभ पहुंचाने के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण 10 फीसदी बढ़ा दिया था। इसमें अल्पसंख्यक समुदाय का स्पष्ट जिक्र नहीं था। वह न तो इसे सही ढंग से तैयार कर सके और न ही राज्यपाल से इस पर मंजूरी की मुहर लगवा सके। ममता ने कहा, हमारी सरकार तय समय में समुदाय के लोगों को उनका वाजिब हक देने पर प्रतिबद्ध है। सरकार पूर्ववर्ती वाम मोर्चा सरकार के प्रयासों पर नए सिरे से विचार करेगी। उन्होंने कहा, कुछ कानूनी जटिलताएं हैं। चूंकि अल्पसंख्यक और अन्य पिछड़ा वर्ग दो अलग अलग शाखाएं हैं, इसलिए विधेयक को समग्र बनाने के लिए दोनों की सहमति जरूरी है। इसके लिए विशेषज्ञ समिति के गठन के कदम उठाए जा रहे हैं ताकि पूर्व की गलतियों को दूर कर नए प्रावधान शामिल करते हुए विधेयक तैयार किया जा सके। बाद में उन्होंने टाउन हाल में अल्पसंख्यकों के विकास तथा आरक्षण की सिफारिश करने वाले सच्चर कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस राजेन्द्र सिंह सच्चर के साथ लंबी बैठक की। एक घंटे चली बैठक के बाद उन्होंने बताया कि सच्चर के साथ मंत्रणा सकारात्मक रही। उन्होंने राज्य में मुसलमानों की शिक्षा-संस्कृति-रोजगार की उपलब्धता आदि मुद्दों पर जानकारी हासिल की तथा मुसलमानों की सामाजिक आर्थिक स्थिति पर खास डाटा तैयार करने का परामर्श दिया। सरकार ने जॉब डाटा बैंक तैयारी समेत उनके अन्य सुझावों को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया है।


No comments:

Post a Comment