Sunday, April 10, 2011

गर्भ निरोध नहीं, भ्रूण हत्या है गैरइस्लामी


इन उपायों को लेकर इस्लामिक समाज में भी जागरूकता आ रही है। जब व्यक्ति शिक्षित होगा और अपनी जिम्मेदारी को समझेगा तो निश्चित तौर पर ऐसे व्यक्ति का परिवार छोटा ही होगा
कोई महिला गर्भवती न हो, इसके लिए पहले से कोई उपाय किया जाए और किसी बच्चे की गर्भ में ही हत्या कर दी जाए, ये दोनों बिल्कुल अलग- अलग बातें हैं। बर्थ कंट्रोल और एबॉर्शन को एक पलड़े पर रखकर नहीं तौला जा सकता। इस्लाम में कभी इस बात की मनाही नहीं है कि कोई महिला गर्भवती होने से बचने के लिए गर्भ निरोधक का इस्तेमाल करे। इस्लाम पुरुष की नसबंदी और उसके द्वारा कंडोम के इस्तेमाल की भी इजाजत देता है।
इस्लाम में गर्भपात हराम
यदि महिला एक बार गर्भवती हो जाए, उसके बाद बच्चे को गिराना इस्लाम में हराम है। आज सोनोग्राफी के जरिये लिंग जांच और उसके बाद गर्भपात की जो घटनाएं सुनने में आती हैं, इस तरह की घटनाएं गैर इस्लामिक हैं। इस्लाम गर्भपात की बिल्कुल इजाजत नहीं देता। या कोई बच्ची दुनिया में आ जाएं और उसके लिंग का पता चल जान के बाद उसे जान से मार दिया जाए। यह बिल्कुल हत्या होगी, जिसकी इजाजत इस्लाम में नहीं है।
गर्भनिरोधक की है इजाजत
मुसलमान सबसे पवित्र किताब 'कुरआन' को मानते हैं। दूसरी जो पवित्र किताब है, उसे कहते हैं 'बुखारी'। उसके अनुसार रसुल्लाह के साथी इस बात का ध्यान रखते थे कि महिलाएं गर्भवती न हों, इसके लिए कुछ तरकीब का इस्तेमाल करते थे। इस बात के लिए मोहम्मद साहब ने उन्हें कभी मना नहीं किया। यदि किसी बात को वे जानते हुए मना न करें तो इसे इस्लाम में उनका समर्थन ही माना जाता है जिसे आप रसूल का मौन समर्थन कह सकते हैं। इस तरह गर्भ न ठहरने के लिए की जाने वाली युक्तियों को इस्लाम में गलत नहीं ठहराया गया। यह जनसंख्या के नियंतण्रमें भी सहायक है।
एबॉर्शन नाजायज
यह तो धीरे-धीरे रिवाज बनता जा रहा है। गर्भ में बच्ची है तो उसे गिरा दो। भारत में इसका रिवाज कुछ ज्यादा ही है। इसके खिलाफ कानून बनाया गया लेकिन उसका भी कुछ खास फायदा नजर नहीं आता। सुनते हैं कि पंजाब में एबॉर्शन का चलन ज्यादा है। इस बात को किसी भी प्रकार से जायज नहीं ठहराया जा सकता। यह बिल्कुल गलत है। जो बच्चा गर्भ में आ गया है,उस बच्चे को मार नहीं सकते। इस्लाम में तो स्त्री और पुरुष दोनों को बराबर का हक मिला है। कहते हैं कि जिस प्रकार सेब के दो भाग करने के बाद दोनों तरफ एक सी बराबरी होती है। उसी प्रकार इस्लाम में स्त्री और पुरुष के बीच का रिश्ता है।
गर्भपात का गुनाह हत्या के बराबर
इस्लाम के कानून के अनुसार गर्भ में पल रही बच्ची को गर्भ में मारा गया तो यह उतना ही संगीन अपराध है जितना हम हत्या को मानते हैं। गर्भ को गिराने वाला हत्या का अपराधी माना जाएगा। इसमें सबसे अधिक दोषी वह डॉक्टर माना जाएगा, जिसने मां-बाप के कहने पर गर्भपात जैसे संगीन अपराध को अंजाम दिया। इसके लिए डॉक्टर को मौत की सजा मिलेगी। मां-बाप को भी कोड़ों की सजा मिलेगी या उन पर आर्थिक जुर्माना लगाकर छोड़ा जाएगा। वह व्यक्ति बिल्कुल सजा का सबसे बड़ा भागीदार है, जिसके हाथों गर्भपात जैसे घिनौना काम का अंजाम दिया गया है। अब धीरे-धीरे गर्भ निरोध के उपायों को लेकर इस्लामिक समाज में भी जागरूकता आ रही है। अधिक बड़ा परिवार धार्मिक मसला कम, अशिक्षा का परिणाम अधिक है। जब व्यक्ति शिक्षित होगा और अपनी जिम्मेदारी को समझेगा तो निश्चित तौर पर ऐसे व्यक्ति का परिवार छोटा ही होगा।
नवजात से 6 वर्ष के बच्चे का लिंगानुपात और 1961-2011 तक के सकल लिंगानुपात
देश में लिंगानुपात 940 है जो 1971 से सर्वाधिक है । लिंगानुपात में 2001 की जनगणना की तुलना में सात अंकों की वृद्धि हुई है। अधिकतर राज्य जहां लिंगानुपात में ज्यादा अंतर था, अब समस्थिति की ओर बढ़ रहे हैं। बिहार औ र जम्मू - कश्मीर दो राज्य हैं, जहां लिंगानु पात में कोई वृद्धि नहीं हुई है। बच्चों के लिं गानुपात में 1961 से ही गिरावट बनी हुई है। 2011 की जनगणना में तो यह सबसे निचले स्तर 914 पर पहुंच गईहै। (मौलाना वहीदुद्दीन से  आशीष कुमार 'अंशु' की बातचीत पर आधारित)

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