मलेशिया में हुए एक नए सर्वेक्षण में पता लगा है कि देश के ज्यादातर युवा अपने संविधान की जगह कुरान को देश चलाने का जरिया बनाना चाहते हैं। एक स्वतंत्र मत सर्वेक्षण कंपनी मर्डेका सेंटर द्वारा किए गए इस सर्वे से पता लगा है कि पूर्वी एशिया का यह देश तेजी के साथ सामाजिक रूप से कट्टरपंथी होता जा रहा है। ये नया सर्वेक्षण उन सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए चिंता का विषय है जो लंबे समय से चेताते रहे हैं कि देश का इस्लामीकरण होता जा रहा है। सर्वेक्षण में यह भी पता लगा है कि अधिकतर युवा अपराधियों के लिए अधिक कड़ी सजाएं चाहते हैं। दस में से सात लोगों का कहना है कि चोरों के हाथ काट देने चाहिए. अधिकतर मानते हैं कि शराब पीने पर कोड़े लगाए जाना सही होगा। इसमें एक अनोखी बात जो सामने आई है वह यह है कि कि मलेशिया के ये मुसलमान धार्मिक परंपराओं का पालन करने में उतने सख्त नहीं हैं। सर्वेक्षण में करीब 70 प्रतिशत लोगों का कहना है कि वो नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद जाने की अपेक्षा घर पर टीवी देखना अधिक पसंद करते हैं। रजाली कहते हैं, आप हमसे पूरे समय प्रार्थना की अपेक्षा नहीं कर सकते। एक अच्छा मुसलमान होने का मतलब है कि अपने जीवन को अच्छे से जिया जाए और जीवन की आम चीजों से आनंद उठाया जाए। सर्वेक्षणकर्ताओं ने 25 साल से कम उम्र के करीब 1000 मुसलमान युवाओं से बात की। हालांकि सर्वेक्षण में कम लोगों से बात की गई है पर ये उन लोगों की बातों की पुष्टि कर रहा है जो यह कहते हैं कि देश के मुसलमान कट्टरपंथी होते जा रहे हैं। पिछले कुछ समय में कई चर्चित घटनाएं घटी हैं जिनसे मलेशिया की एक नरमपंथी मुसलमान राष्ट्र की छवि को धक्का लगा है। 2010 में तीन ऐसी महिलाओं को कोड़े लगाए गए थे जिन्हें अपने वैवाहिक संबंधों के बाहर शारीरिक संबंध बनाए का दोषी पाया गया था। यूं तो मलेशिया में शरियत के कानून केवल मुसलामानों पर लागू होते हैं, पर शायद ही किसी को विवाहेतर संबंधों या शराब पीने के लिए दंडित किया गया हो। लेकिन अब कट्टरपंथी निजी गलतियों को अपराध की तरह से देख रहे हैं। -साभार बीबीसी
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