Saturday, October 20, 2012

अवैध मस्जिद शीघ्र ढहाने के आदेश




ठ्ठजागरण संवाददाता, नई दिल्ली सुभाष पार्क अवैध मस्जिद मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को आदेश जारी किया कि वह अदालत के 30 जुलाई को दिए हुए आदेशों के अनुसार नगर निगम द्वारा अवैध ढांचे को ढहाने की कार्रवाई में जल्द से जल्द सहयोग प्रदान करे। जिससे अवैध ढांचा गिराने के बाद एएसआइ वहां पर जांच कर सके। इसी के साथ ही उच्च न्यायालय की स्पेशल बेंच ने दिल्ली पुलिस और विधायक शोएब इकबाल द्वारा दायर दो अलग-अलग याचिकाओं को खारिज कर दिया है। उच्च न्यायालय के जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस एमएल मेहता और जस्टिस राजीव शकधर की स्पेशल बेंच ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि 30 जुलाई को उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने सुभाष पार्क में अवैध मस्जिद को ढहाने के लिए दिल्ली पुलिस से मदद मांगी थी। पुलिस ने कहा था कि अभी रमजान है, स्वतंत्रता दिवस है और बाबा रामदेव का आंदोलन है। इसलिए उनके पास फोर्स की कमी है। पुलिस ने यह भी कहा था कि मौजूदा अवैध मस्जिद को ढहाने के लिए विधायक शोएब इकबाल को निर्देश जारी किए जाएं। दिल्ली पुलिस का कर्तव्य बनता है कि वह शांति व्यवस्था बनाए रखे और किसी भी स्थिति में कानून न टूटे। वह अवैध मस्जिद ढहाने में नगर निगम के दस्ते की मदद करते हुए उच्च न्यायालय के 30 जुलाई के आदेशों का पालन करे। पुलिस की अर्जी को खारिज किया जाता है। दिल्ली पुलिस मामले में जरूरी फोर्स नगर निगम को मुहैया कराए और यह कार्रवाई जल्द से जल्द की जाए। यह पूरी कार्रवाई एएसआइ के मार्गदर्शन में होगी, क्योंकि विवादित क्षेत्र उनके संरक्षण में है। नहीं बनेगी एक्सपर्ट कमेटी : उच्च न्यायालय ने कहा कि विधायक शोएब इकबाल ने याचिका दायर की थी कि एएसआइ के कार्यो का निरीक्षण करने के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाई जाए। इस याचिका के माध्यम से विधायक ने एक बार फिर मामले को लंबा खिंचने का प्रयास किया है। अदालत अपने 30 जुलाई के आदेश में इन सब मामलों पर पहले ही विचार कर चुकी है। इस पर दोबारा से विचार करने की जरूरत नहीं है। आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया अर्थात एएसआइ पूरे मामले को देख रही है। यह एक तकनीकी कार्य है। इस कार्य पर न तो संदेह किया जा सकता है और न ही सवाल उठाया जा सकता है। एएसआइ अपने आप में ही एक सर्वोच्च कमेटी है, ऐसे में उसके कार्य की निगरानी के लिए किसी भी एक्सपर्ट कमेटी या लोकल कमिश्नर नियुक्त किए जाने की जरूरत नहीं है। नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं: उच्च न्यायालय ने कहा कि जहां तक अवैध मस्जिद में नमाज अदा करने की अनुमति दिए जाने की बात है, उक्त क्षेत्र अभी एएसआइ की घेराबंदी में है, ताकि उनके कार्य में कोई बाधा न हो। अगर, उस जगह पर कोई मस्जिद के अवशेष प्राप्त भी होते हैं तो वह कानून के अनुसार संरक्षित धरोहर होगी और ऐसी जगहों पर नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी जाती। ऐसे में सुभाष पार्क में बनाई गई अवैध मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति दिए जाने का सवाल ही नहीं उठता। मीडिया कवरेज पर नहीं लगेगी पाबंदी : सुभाष पार्क अवैध मस्जिद मामले में याचिका दायर कर मांग की गई थी कि मीडिया पर उक्त मामले की कवरेज किए जाने पर रोक लगाई जाए। उच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मीडिया समझदार है और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझती है। लिहाजा, उन पर मामले को लेकर पाबंदी नहीं लगाई जा सकती। याचिकाकर्ता की सुरक्षा पर विचार करे पुलिस : सुभाष पार्क अवैध मस्जिद मामले में एक याचिकाकर्ता एसएस साई ओम जी द्वारा उन पर हुए हमले को लेकर की गई सुरक्षा व्यवस्था की मांग मामले का निपटारा करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि दिल्ली पुलिस याचिकाकर्ता की मांग पर विचार करते हुए इस पर उचित कार्रवाई करे।


Dainik Jagran National Edition 20-10-2012Pej-2(bLykfed nqfu;k)

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