सुभाष पार्क में अवैध निर्माण ढहाने का आदेश
बरकरार रखा
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नई दिल्ली (एसएनबी)। ऐतिहासिक जामा
मस्जिद के निकट
मेट्रो की खुदाई के दौरान कथित रूप से मिले मुगलकालीन अवशेषों पर किए गए
निर्माण को अवैध बताते हुए हाईकोर्ट ने उसे पुन: गिराने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट की फुल बेंच ने इस मामले से संबंधित सभी अर्जियों को खारिज करते
हुए कहा कि 30 जुलाई
को दिए आदेश पर पुनर्विचार करने की जरूरत नहीं है। उसे बरकरार रखा जाता है। 30 जुलाई को हाईकोर्ट ने पुरातत्व
सव्रेक्षण (एएसआई)
को अवैध निर्माण गिराने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट की फुल बेंच ने अपने
निर्देश में कहा था कि एएसआई वहां की खुदाई व जांच कर जल्द यह तय करेगी
कि वहां मुगलकालीन दौर का कोई निर्माण था या नहीं। पीठ ने इस मामले में
मटिया महल के विधायक शोएब इकबाल की नमाज पढ़ने की इजाजत देने की मांग के
साथ स्थगनादेश व कमेटी बनाने की मांग वाली अर्जी पर भी पुनर्विचार न करने
की जरूरत बताते हुए कहा कि वहां नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती क्योंकि
वहां लगातार नमाज नहीं हो रही थी और वह इलाका एएसआई के संरक्षण में है।
पीठ ने कहा कि यदि वहां स्मारक पाया भी गया तो वह एएसआई द्वारा ही संरक्षित
किया जाएगा। इसी तरह दिल्ली पुलिस की उस अर्जी को भी अदालत ने बेमायने
बताया जिसमें रमजान व अन्य पर्व के मद्देनजर 30
जुलाई के आदेश में
संशोधन करने की मांग करते हुए मोहलत मांगी गई थी। पीठ ने कहा
कि अब समय बीत चुका
है, उक्त
अर्जी अब विचार के योग्य नहीं है। पीठ ने अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एसएस
साईंबाबा ओमजी की अर्जी के मद्देनजर
कहा कि पुलिस उनकी सुरक्षा व शिकायतों को देखे और उनके दावों
की जांच करे जैसा
कि पूर्व के आदेश में कहा गया था। जानकारी हो कि इससे पहले हाईकोर्ट ने
विवादित जगह पर किसी तरह के निर्माण पर रोक लगाते हुए उक्त जगह एएसआई को सौंपने
का आदेश दिया था ताकि वहां वैज्ञानिक जांच कर यह पता लगाया जा सके कि
वहां का इतिहास क्या है। न्यायमूर्ति एसके कौल,
राजीव शकधर व एमएल मेहता की फुल बेंच ने सभी अर्जियों का निपटारा
करते हुए कहा कि सभी पक्षों की
जिरह सुनने के बाद यही निष्कर्ष निकाला जाता है कि 30 जुलाई को दिए आदेश पर पुनर्विचार
या संशोधन करने की जरूरत नहीं है अत: एएसआई अपने 19
जुलाई की
नोटिस का पालन करे। फुल बेंच ने कहा कि जैसा कि पहले आदेश दिया
जा चुका है दिल्ली
पुलिस नई दिल्ली नगर निगम को आवश्यक पुलिस बल मुहैया कराए ताकि एएसआई
की निगरानी में अवैध निर्माण गिराया जा सके। एएसआई ने नोटिस में कहा था
कि उक्त इलाके में किसी भी तरह का निर्माण करने की इजाजत नहीं है क्योंकि
सुभाष पार्क सुरक्षित इलाका है। वहां ऐतिहासिक सुनहरी मस्जिद व लालकिला
मौजूद है। उक्त इलाके में किसी भी तरह के निर्माण के लिए राष्ट्रीय स्मारक
प्राधिकरण की इजाजत जरूरी है। पीठ ने शोएब इकबाल की उक्त अर्जी जिसमें
जाने-माने लोगों की एक कमेटी बनाकर एएसआई को सहयोग करने की मांग, लोकल कमिश्नर नियुक्त करने की मांग व
नमाज पढ़ने की इजाजत देने आदि की मांग
की गई थी की बाबत कहा कि इन मुद्दों पर पहले भी विचार किया जा
चुका है, पुनर्विचार
की जरूरत नहीं है। एएसआई जिस तरह से सारे पहलुओं को देख रही है उसकी
योग्यता व विश्वसनीयता पर शक नहीं किया जा सकता। इस मामले में फुल बेंच
ने 30 जुलाई
के आदेश में कहा था कि एएसआई को इस बात की जांच अभी से शुरू कर देनी चाहिए। खुदाई के दौरान जो
चीजें मिली हैं उसकी वैज्ञानिक जांच
कराई जाए ताकि यह जाना जा सके कि कथित रूप से मुगलकालीन
अवशेषों वाली जगह का
इतिहास क्या है। इस मामले में वकीलों के एक समूह द्वारा दायर याचिका पर सीनियर
एडवोकेट अमन लेखी ने आरएलडी विधायक शोएब इकबाल के खिलाफ सरकारी जमीन पर
अवैध तरीके से निर्माण करने की बाबत कानूनी कार्रवाई करने की मांग की थी
वहीं अखिल भारत हिंदू महासभा की मांग थी कि अदालत उक्त स्थान पर हिंदू/जैन
मंदिर बनाने की इजाजत दे। पीठ ने सभी तरह की धार्मिक गतिविधियों पर
रोक लगाते हुए सभी पक्षकारों को शांति बनाए रखने की बात कहते हुए कानून का
पालन करने का निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट ने कहा,
30 जुलाई के फैसले पर
पुनर्विचार की जरूरत नहीं मामले से संबंधित सभी अर्जियां खारिज
Rashtirya sahara National Edition
20-10-2012 Prj-6 bLykfed nqfu;k)
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