सोपोर वादी में पूरे साल उथल-पुथल मचाए रखने वाले पत्थरबाजों को सिर्फ लश्कर या हुर्रियत कांफ्रेंस ही नहीं, बल्कि कई सरकारी कर्मचारियों का भी समर्थन मिला हुआ था। यह कर्मचारी उनकी मदद करते हुए उन्हें देश विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के लिए उकसाते थे। दैनिक जागरण पहले ही हिंसक प्रदर्शनों में मस्जिदों के इमाम, हुर्रियत कांफ्रेंस, आतंकी संगठनों व सरकारी कर्मचारियों की संलिप्तता उजागर कर चुका है। इस पर सोमवार को उत्तरी कश्मीर रेंज के डीआइजी मुनीर खान ने भी मुहर लगा दी। उन्होंने बताया कि इस साल जनवरी में पथराव का जो सिलसिला शुरू हुआ वह पूरी तरह लश्कर, हरकत-उल-मुजाहिदीन और हुर्रियत कांफ्रेंस के गिलानी गुट की साजिश थी। इसमें कई सरकारी कर्मचारी भी शामिल रहे। पथराव में शामिल युवकों को 400 रुपये रोजाना मिलते थे। यह पैसा लश्कर कमांडर अब्दुल्ला उन्नी और हरकत-उल-मुजाहिदीन का कमांडर कलीमुल्ला और हुर्रियत कांफ्रेंस उपलब्ध कराते थे। उन्होंने बताया कि कुख्यात पत्थरबाज फिरदौस उर्फ बीरबल ने कई अहम खुलासे किए हैं। इसके आधार पर हुर्रियत के गिलानी गुट के गुलाम मोहम्मद तांत्रे समेत चार लोग पकडे़ जा चुके हैं। इसके अलावा अशरफ मलिक और बशीर अहमद तेली नामक दो सरकारी कर्मी भी उनका साथ देते रहे हैं।अशरफ पकड़ा जा चुका है जबकि सीएपीडी में कार्यरत बशीर और गिलानी का खास गुलाम हसन मीर उर्फ छोटा गिलानी फरार हैं। डीआइजी ने बताया कि सोपोर में फिलहाल 15-20 कुख्यात आतंकी छिपे हैं। इस साल यहां कुल 26 आतंकी मारे गए जबकि एक विदेशी समेत 12 आतंकी जिंदा पकड़े गए। इनके कब्जे से 30 एसाल्ट राइफलें, नौ पिस्तौल, दो हजार एके कारतूस, छह यूबीजीएल, तीन दर्जन से ज्यादा हथगोले, तीन सेटेलाइट फोन, एक सिलेंडर आईईडी समेत भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया गया ।
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