पाकिस्तान में भयंकर आर्थिक तंगी के चलते एक आदमी की कमाई में घर चलाना मुश्किल हो गया है। इसके चलते महिलाएं नौकरी करने के लिए मजबूर हैं। यहां पर कई मध्यमवर्गीय महिलाओं को आजकल मैक डोनाल्ड और केएफसी जैसे फूड आउटलेट्स पर काम करते देखा जा रहा है। इन्हीं में से एक है 21 वर्षीया सुल्ताना। उन्होंने मैक डोनाल्ड में कैशियर की नौकरी के लिए मई में अपना घर छोड़ दिया। भाई के कड़े विरोध के चलते सुल्ताना को यह कदम उठाना पड़ा। उसका रूढि़वादी भाई रेस्त्रां की यूनीफॉर्म पहनने के लिए सुल्ताना को गाली देता था। अब वो अपनी यूनीफॉर्म को छिपाने के लिए बुर्का पहनकर काम पर जाती है। यहीं नहीं हर महीने अपने घर पर सौ डॉलर (करीब साढ़े चार हजार रुपये) भेजती है। सुल्ताना एक बानगी है। उसके जैसी सैकड़ों लड़कियां अपने घर चलाने के लिए नौकरी करने से गुरेज नहीं कर रहीं। केएफसी पाकिस्तान के कार्यकारी प्रमुख रफीक रंगूनवाला का कहना है कि महिलाओं की नौकरी केवल आर्थिक वजह से ही नहीं बल्कि देश की भी जरूरत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले साल तक उनके आउटलेट्स में महिला कर्मचारियों की संख्या दोगुनी हो जाएगी। उन्होंने कहा, अगर हम अपने यहां महिला कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ाते तो पाकिस्तान कभी तरक्की नहीं कर पाएगा और हमारी गिनती हमेशा तीसरी दुनिया के देश में ही होगी। यहां मैकडोनाल्ड, केएफसी और सुपरमार्केट जैसी जगहों पर काम करने वाली महिलाओं की संख्या 2006 से अब तक चार गुना बढ़ी है। मगर यहां के पुरुषों की मानसिकता अब भी दकियानूसी है। वे महिलाओं के काम करने के खिलाफ हैं। हाल ही में नौकरी शुरू करने वाली सौ से ज्यादा महिलाओं ने लगातार मानसिक प्रताड़ना दिए जाने की भी शिकायत की है। कई बार उन्हें ग्राहकों के गुस्से का भी शिकार होना पड़ता है। सुल्ताना ने कहा, अगर मैं नौकरी छोड़ दू तो घर में सब खुश हो जाएंगे लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर मेरे घर पर पड़ेगा।
No comments:
Post a Comment