Saturday, February 12, 2011

मुस्लिम हकीम की सलाह से ही गर्भपात की इजाजत


दारुल उलूम देवबंद ने नया फतवा जारी किया है। इसमें गर्भपात कराने से पहले हकीम या किसी मुस्लिम चिकित्सक से सलाह लेने की बात कही गई है। यही नहीं गर्भ में पल रहे तीन महीने से अधिक के भ्रूण का गर्भपात हराम बताया गया है। फतवों की श्रेणी में मुस्लिम संस्थान से एक शख्स ने पूछा, हमारे दो बच्चे हैं। छोटा 11 महीने का है। मेरी पत्नी फिर गर्भवती है। चिकित्सक ने उसकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए उसे अगले बच्चे के लिए लगभग ढाई साल इंतजार करने को कहा है। वह गर्भपात कराना चाहती है। क्या इसकी इजाजत है? इसके जवाब में कहा गया कि अगर कोई मुस्लिम चिकित्सक यह कहे कि महिला गर्भावस्था और प्रसव का दर्द सहन करने में सक्षम नहीं है, तो तीन महीने से कम के भू्रण का गर्भपात कराया जा सकता है। हालांकि चिकित्सकों की दृष्टि में देवबंद का यह फतवा भी अनुचित है। उनका मानना है कि अगर कोई प्रशिक्षित चिकित्सक गर्भपात की सलाह देता है, तो वह महिला की हालत देख कर ही इसका फैसला लेता है, जबकि नीम-हकीम किसी महिला की हालत का बेहतर तरीके से अंदाज नहीं लगा सकते। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. फौजिया खानम कहती हैं, प्रशिक्षित चिकित्सक एक परीक्षण से गर्भावस्था की शुरुआत में ही पता लगा सकते हैं कि महिला की हालत प्रसव का दर्द सहने लायक है या नहीं, जबकि हकीमों के तरीके से सभी वाकिफ हैं। देवबंद ने इसके पहले अपने एक फतवे में कहा था कि गर्भधारण रोकने के लिए गर्भनिरोधकों का इस्तेमाल भी हकीम से पूछ कर ही करना चाहिए। अगर हकीम इसकी इजाजत देता है, तो इसका इस्तेमाल हराम नहीं है।

No comments:

Post a Comment