Saturday, March 12, 2011

कन्या भ्रूण हत्या पर बंद होगा हुक्का-पानी


कन्या भू्रण हत्या रोकने के लिए ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड एक नई पहल करने जा रहा है। बोर्ड लखनऊ में हेल्पलाइन स्थापित करेगा। गर्भ में लड़की होने पर अगर ससुराल में बहू पर गर्भपात कराने के लिए दबाव पड़ता है तो उसे हिम्मत कर इस हेल्पलाइन पर बस एक फोन करना होगा, बाकी का काम बोर्ड संभाल लेगा। ऐसा न करने के लिए पति को समझाया जाएगा। अगर वह नहीं मानता है तो उस परिवार का सामाजिक बहिष्कार का एलान हो जाएगा। उस परिवार में न कोई अपनी लड़की देगा और न ही उस परिवार की लड़की को अपने यहां ब्याहेगा। सुख-दुख में भी उस परिवार से कोई राब्ता नहीं रहेगा। ऑल इंडिया शिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का दो दिवसीय अधिवेशन शनिवार से लखनऊ में शुरू हो रहा है। बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना मिर्जा मोहम्मद अतहर ने दैनिक जागरण से कहा कि अधिवेशन में इस प्रस्ताव को मंजूरी दिलाई जाएगी। मौलाना ने कहा कि इस्लाम में गर्भपात हराम है। गर्भपात को उसी सूरत में जायज माना गया है जब औरत की जिंदगी बचाने के लिए ऐसा करना अपरिहार्य हो। इसके बावजूद मुस्लिम समाज में कन्या भ्रूण हत्या के मामले बढ़ रहे हैं। ससुराल में बहू पर जब गर्भपात के लिए दबाव डाला जाता है, तो वह समझ नहीं पाती कि आखिर मदद के लिए किससे गुहार लगाए। इसी के दृष्टिगत बोर्ड यह पहल कर रहा है। इस सवाल पर कि अगर बहू ससुराल की शिकायत दर्ज कराती है तो क्या इसका असर उसके वैवाहिक जीवन पर नहीं पड़ेगा, मौलाना अतहर ने कहा कि समाजिक बहिष्कार का खौफ बहू को ससुराल में और ज्यादा सुरक्षित बनाएगा। निकाह के वक्त ही मेहर : शिया बोर्ड की एक कोशिश निकाह के वक्त ही मेहर चुकाने को अनिवार्य किए जाने को लेकर भी है। मुस्लिम समाज में निकाह के वक्त मेहर की राशि तय होती है, जिसे चुकाने का जिम्मा लड़के वालों का होता है। इस्लाम की यह रवायत एक तरह से लड़की की आर्थिक सुरक्षा के लिए है, लेकिन आम तौर पर यह रकम लड़के वाले चुकाते नहीं है। उसे चुकाने की नौबत उसी सूरत में आती है जब कभी तलाक होता है, लेकिन बोर्ड चाहता है कि निकाह के वक्त ही यह रकम लड़की को नकद दी जाए। बोर्ड के अधिवेशन में इस मुद्दे पर प्रस्ताव पारित होने की उम्मीद है। महंगी शादियों के खिलाफ भी लाया जाएगा प्रस्ताव बैठक में महंगी शादियों के खिलाफ भी प्रस्ताव पारित होगा। मौलाना अतहर ने कहा शादियां साल दर साल महंगी हो रही हैं। आर्थिक दृष्टि से कमजोर मां-बाप के लिए अपनी लड़कियों को ब्याहना बहुत मुश्किल काम होता जा रहा है। शादियों में खर्च को सीमित करने के लिए बोर्ड सामूहिक शादियों के चलन को बढ़ावा देने के लिए प्रस्ताव पारित करेगा। बोर्ड का मत है कि अगर सामूहिक विवाह किए जाएं तो इससे खर्च को सीमित किया जाएगा|

No comments:

Post a Comment