पंजाब प्रांत के उदारवादी गवर्नर सलमान तसीर की हत्या के बाद से पाकिस्तान का ईशनिंदा कानून अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है। हालांकि इसके विरोध में पाकिस्तान के ईसाई संगठन आवाज उठाते रहे हैं, लेकिन उनके आंदोलन को अभूतपूर्व बल हाल ही में मिला जब सलमान तसीर उनके साथ खड़े हुए और ईशनिंदा कानून को काला कानून की संज्ञा दी। यह बात पाकिस्तान के उस कट्टरपंथी तबके को बेहद नागवार गुजरी। इस मामले ने पाकिस्तान के उन आतंकी संगठनों को सुनहरा मौका भी दे दिया, जिनके खात्मे के लिए भारत और अमेरिका दबाव बना रहे हैं। दरअसल पाक की अदालत ने 9 नवंबर 2010 को अल्पसंख्यक ईसाई महिला आसिया बीबी को इशर्निंदा कानून के तहत मौत की सजा दी थी। वहां रहने वाले 30 लाख ईसाइयों ने सजा को अत्याचार बताया और आसिया को न्याय दिलाने के लिए मुहिम छेड़ते हुए ईशनिंदा कानून में बदलाव की मांग कर डाली। इसके बाद तसीर के बयान ने आग में घी का कार्य किया। ईशनिंदा की काली छाया का प्रभाव केवल पाकिस्तान में ही नहीं है। दुनियाभर के इस्लामिक राष्ट्र इसे लेकर संवेदशनशील हैं। डेनमार्क के अखबार में छपे कार्टून पर जो भूचाल आया वह हम सभी ने देखा। ईशनिंदा कानून समुदाय विशेष का वर्चस्व कायम करने का माध्यम है। संयुक्त राष्ट्र में इसके विरोध में कई बार प्रस्ताव पारित किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हो सका।
ईशनिंदा कानून : ईश-निंदा कानून यानी तौहीने रिसालत का उस समय प्रयोग होता है जब कोई व्यक्ति इस्लाम का अपमान करता है। पाकिस्तान के संविधान की धारा 295-बी के अनुसार यदि कोई कुरान या पैगंबर मोहम्मद का अपमान करता है तो उसे आजीवन कारावास या फांसी की सजा दी जा सकती है। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने कई बार इस क़ानून को ख़त्म करने या इसमें संशोधन करने की मांग की है, क्योंकि इसका दुरुपयोग हो रहा है। वहां के कट्टरपंथी संगठन मजहब के नाम पर जनसमर्थन हासिल करने के लिए इस कानून को हथियार बनाते रहे हैं। मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी पाकिस्तान सरकार से ईशनिंदा कानून को खत्म करने की मांग की है। पाकिस्तान की तरह कई अन्य मुस्लिम राष्ट्रों में भी कानून है।
चर्चित मामले : कराची में अगस्त 2008 में एक फैक्ट्री में काम करने वाले 22 वर्षीय जगदीश पर उनके साथियों ने आरोप लगाया था कि उन्होंने कथित तौर पर पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया है। बाद में मुस्लिमों ने उस गरीब हिंदू परिवार के सदस्यों को पुलिस के सामने मारा और फिर जला दिया। पुलिस ने उस हिंदू को जलाने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इसी प्रकार का मामला पिछले साल पंजाब के शहर गोजरा में सामने आया। एक ईसाई परिवार पर कुरान की प्रतियां जलाने का आरोप लगा। गांव वालों ने आक्रोश में इखलास मसीह के घर को आग लगा दी व पांच ईसाइयों की जलकर मौत हो गई। पंजाब के जिले ननकाना साहब की स्थानीय अदालत ने कुछ दिन पहले ईशनिंदा के जुर्म में ईसाई महिला आसिया बीबी को मौत की सजा सुनाई है। इस आरोप में किसी महिला को मौत की सजा सुनाने की यह पहली घटना है। तसीर इसी महिला को माफी देने की वकालत कर रहे थे, लेकिन महिला को इंसाफ दिलाने से पहले ही उनके कट्टरपंथी अंगरक्षक ने उन्हें गोली मार दी।
मुमताज कादरी को प्रेरित करने वाले दो हिरासत में लिए
पाकिस्तानी पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने पंजाब प्रांत के गवर्नर सलमान तसीर की हत्या के लिए उनके सुरक्षाकर्मी मुमताज कादरी को कथित तौर पर प्रेरित किया था। कादरी देश के विवादास्पद ईश निंदा कानून की आलोचना करने को लेकर तसीर से खफा था। पाकिस्तानी मीडिया में आई खबरों के अनुसार, कादरी के मोबाइल फोन के रिकार्ड की जांच के आधार पर इन संदिग्धों को लाहौर और रावलपिंडी से हिरासत में लिया गया है। पुलिस का मानना है कि कादरी इनमें से एक संदिग्ध के साथ कुछ दिनों के लिए लाहौर में रहा था। इसके कुछ दिन बाद ही उसने इस्लामाबाद के एक व्यस्त बाजार में मंगलवार को तसीर की गोली मार कर हत्या कर दी। रावलपिंडी के दूसरे संदिग्ध के बारे में माना जाता है कि उसने देश के ईशनिंदा कानून की आलोचना करने को लेकर तसीर की हत्या के लिए प्रेरित किया था।
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