लेखक कट्टरपंथियों के निरंतर बढ़ते प्रभाव को पाकिस्तान के अस्तित्व के लिए खतरा मान रहे हैं….
हाल ही में एमजे अकबर की पुस्तक टिंडर बॉक्स प्रकाशित हुई है, जिसमें पाकिस्तान के मौजूदा हालात का ब्यौरा दिया गया है। इसे लेकर पाकिस्तानी काफी नाक-भौं सिकोड़ रहे हैं। टिंडर बॉक्स का मतलब होता है विस्फोटक से भरा डिब्बा। अकबर के मुताबिक पाकिस्तान बारूद से भरा एक डिब्बा बन चुका है, जो कभी भी तबाह हो सकता है। असलियत भी यही है। पिछले दिनों लाहौर से वहां संसद सदस्य रह चुके तारिक बांडे के भाई खालिद बांडे भारत आए थे। उनका कहना था कि वहां कट्टरपंथियों का दबदबा दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है और पंजाब के गवर्नर सलमान तसीर की हत्या ने सबकी आंखें खोल दी हैं। उनकी हत्या के जरिए कट्टरपंथी मौलानाओं ने जरदारी सरकार को संदेश दिया है कि सब कुछ हमारे हाथ में है। तुम्हें जिस पुलिस और फौज का भरोसा है उसे भी हम ही नियंत्रित करते हैं। हमारे कहने पर पुलिस वाले जिसकी चाहे उसकी हत्या कर देते हैं। सबको मालूम है कि गवर्नर की हत्या उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिस वाले ने की और बाद में मौलानाओं और कट्टरपंथी वकीलों ने उसे फूलमालाएं पहनाईं। गवर्नर के जनाजे में कोई शामिल नहीं हुआ और सुपुर्दे खाक के वक्त फातिया पढ़ने के लिए मौलवी या मौलाना आतंकवादियों के डर से नहीं आया। बाद में उनको सरकारी देखरेख में दफन कर दिया गया। सलमान तसीर एक खुले दिमाग के पढ़े-लिखे इंसान थे। उन्होंने पाकिस्तान की पढ़ी- लिखी समझदार जनता की हमेशा नुमाइंदगी की। वह मजहब के नाम पर किसी के साथ भेदभाव के खिलाफ थे। किस्सा कुछ यूं हुआ कि एक ईसाई महिला की उसके मोहल्ले की कुछ औरतों से नल के पानी को लेकर कहासुनी हो गई। उन मुस्लिम औरतों ने थाने में झूठी शिकायत दर्ज करा दी कि इसने इस्लाम के खिलाफ बोला है। पाकिस्तान में जनरल जिया उल हक ने मौलानाओं को खुश करने के लिए एक कानून बनाया था कि यदि पुलिस में कोई मुस्लिम किसी गैर मुस्लिम के खिलाफ शिकायत दर्ज करता है कि उसने इस्लाम के खिलाफ बोला तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर लेना चाहिए। इस कानून का पाकिस्तान में जमकर दुरुपयोग हो रहा है। इसके खिलाफ कई पढ़े-लिखे मुस्लिम कई बार सक्रिय हुए हैं, लेकिन मौलानाओं ने उन्हें दबा दिया। पिछले कुछ दिनों से वहां मंत्री रहीं शेरी सरदार ने बीड़ा उठाया कि इस कानून में बदलाव लाना चाहिए और जेल में डालने के पहले शिकायत की तफ्तीश होनी चाहिए। इस बात का समर्थन पंजाब के गवर्नर सलमान तसीर ने भी किया और उन्होंने उस ईसाई महिला को राहत दिलाने की कोशिश की। इस बात से उनके साथ तैनात सुरक्षाकर्मी चिढ़ गया और वह मौलानाओं के संपर्क में आया। कट्टरपंथी मौलानाओं ने उसे भड़काया तथा उसने गवर्नर की हत्या उस समय कर दी जब वह इस्लामाबाद किसी मीटिंग के सिलसिले में आए हुए थे। पाकिस्तान के तमाम समझदार वकीलों ने इसके खिलाफ आवाज भी उठाई और ऐसे वकीलों की निंदा की जिन्होंने हत्यारे के अदालत में पेश होने के वक्त उसको फूलों की माला पहनाई। पाकिस्तान के तमाम समझदार लोगों का कहना है कि पता नहीं कहां से इतना कट्टरपंथ उनके देश में फैलता जा रहा है। खालिद बांडे की पत्नी ने बताया कि लाहौर जैसे शहर में अब यह माहौल हो गया है कि बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल में मौलाना घूमते हैं और औरतों को चेतावनी देते हैं कि वे अपना सिर ढकें और कौन से कपड़े पहनें। वह बचपन से वहां रह रही हैं और उनका कहना है कि ऐसा लाहौर में कभी नहीं हुआ था। लाहौर हमेशा से एक आजाद, उदार, खुले दिल का शहर रहा, जहां पश्चिमी सभ्यता फैली रही और युवक-युवतियों पर कभी कोई पाबंदी नहीं रही। अब दिनोंदिन माहौल बदलता जा रहा है। कट्टरपंथी इस्लाम के नाम पर मुसलमानों को ही मार रहे हैं और मुसलमानों को ही तंग किया जा रहा है। पहले पुलिस ऐसे लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करती थी, लेकिन आज आलम यह है कि पुलिस वाले इनसे डर रहे हैं। आए दिन मस्जिदों में बम लगाए जा रहे हैं। शिया और अहमदी मुसलमानों को तो जमकर रोज मारा जा रहा है। इनके आगे सरकार भी बेबस है। सरकार में बैठे लोगों को भी यह डर लगा रहता है कि उन्हें कभी भी मारा जा सकता है इसलिए ये लोग अपनी हिफाजत में ही लगे रहते हैं। आम जनता आज भी कट्टरपंथियों के खिलाफ है। जिन लोगों के पास पैसा है वे या तो दुबई जाकर बस रहे हैं या मलेशिया चले जा रहे हैं। पढ़े-लिखे लोगों की समस्या यह है कि अब पश्चिमी देश उन्हें वीजा नहीं देते हैं। इसलिए उनके पास दुबई, अबूधाबी, बहरीन, मलेशिया के अलावा और कहीं जाने का चारा नहीं है। दुबई में भी अब पाकिस्तानियों के लिए वर्क परमिट बहुत मुश्किल काम हो गया है। दुबई सरकार बहुत सोच-समझ कर पाकिस्तानियों को आने देती है। शेरी ने इस कानून के खिलाफ अभी भी अपनी लड़ाई जारी रखी है। कट्टरपंथी उन्हें भी कभी भी मार सकते हैं। इन हालात में पाकिस्तान सरकार को उन्हें कड़ी सुरक्षा देनी चाहिए। दरअसल, जनरल जिया ने जाते-जाते पाकिस्तान को यह रोग लगा दिया था। शुरू में वह भी इस्लामिक कट्टरपंथ के बहुत खिलाफ थे, लेकिन जब उनका विरोध बहुत बढ़ गया और वह जनता में अलोकप्रिय हो गए तो उन्होंने मजहबी कार्ड खेला और शरीयत कानून लागू करवा दिया। यही नहीं, उन्होंने मौलानाओं के दबाव में एक ऐसा कानून बनाया जिसमें पैगंबर के खिलाफ या इस्लाम के खिलाफ बोलने वाले को कड़ी सजा का प्रावधान है। इस कानून में यह साबित करने की जरूरत नहीं है कि उस व्यक्ति ने सचमुच ऐसा बोला है या नहीं। यदि कोई इस्लाम का मानने वाला दूसरे के खिलाफ शिकायत कर देता है, भले ही वह झूठी हो तो उसे पुलिस को मानना ही पड़ेगा। पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान में गैर इस्लामी लोगों के खिलाफ इस कानून का बेइंतहा बेजा इस्तेमाल हुआ है। तमाम मुसलमानों ने इसके खिलाफ जमकर आवाज उठाई, लेकिन उनकी आवाज दबा दी गई। अकबर ने सही कहा है कि यदि पाकिस्तान के हालात ऐसे ही रहे तो यह अपने अंदर बढ़ रहे बारूद से खुद ब खुद खाक हो जाएगा। बेहतर हो कि पाकिस्तान के लोग पहले से ही चेत जाएं और इस तरह की चीजों पर अंकुश लगाएं। उनके खिलाफ अभी से ही पहल करके लड़ाई शुरू कर दें और एक प्रगतिशील खुले विचारों वाले पाकिस्तान को बनाने का प्रयास करें। अभी तो कट्टरपंथियों का साम्राज्य शहरों और कस्बों में चल रहा है, जिस दिन वे गांवों में घुसना शुरू करेंगे तब कोई भी सरकार हालात को सुधार नहीं पाएगी। वहां तालिबान का कब्जा हो जाएगा। (लेखक राज्यसभा सदस्य हैं)
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