पाकिस्तान की एक अदालत ने एक इमाम और उसके बेटे को विवादास्पद ईशनिंदा कानून का उल्लंघन करने के जुर्म में उम्र कैद की सजा सुनाई है। दोनों पर कुरान की आयत लिखे पोस्टर को हटाने और फाड़ने का आरोप है। पंजाब के डेरा गाजी खान में एक आतंकवाद निरोधी अदालत के न्यायाधीश राव अयूब ने 45 वर्षीय मुहम्मद शफी और उसके 20 वर्षीय बेटे मुहम्मद असलम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया। लाहौर से चार सौ किलोमीटर दूर मुजफ्फरगढ़ में एक मस्जिद के इमाम शफी और उसके बेटे को उनकी किराने की दुकान के बाहर लगे एक धार्मिक जलसे से संबंधित पोस्टर को हटाने को लेकर पिछले साल अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था। अधिकारियों के मुताबिक पोस्टर पर कुरान की आयत लिखी थीं। पैगंबर मुहम्मद के जन्मदिन की वर्षगांठ के सिलसिले में आयोजित किए गए इस जलसे के आयोजकों ने शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना था दोनों ने पोस्टर को फाड़ा और पैरों तले कुचल दिया। ईशनिंदा का दोषी पाए जाने के बाद जज अयूब ने दोनों को अन्य धर्मो और विश्वासों का अपमान करने के जुर्म में 10 साल की अतिरिक्त कैद की सजा भी सुनाई है। साथ ही 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि इस फैसले को लाहौर उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों को ईशनिंदा का दोषी इसलिए ठहराया गया, क्योंकि उनके देवबंद के साथ मतभेद थे। उल्लेखनीय है ईशनिंदा के आरोप में ईसाई महिला आसिया बीबी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। पंजाब के गवर्नर सलमान तसीर ने इस कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए इसमें संशोधन की वकालत की थी। इससे नाराज होकर उनके सुरक्षाकर्मी ने पिछले दिनों तसीर की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
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