Sunday, January 23, 2011

तसीर मामले पर पाकिस्तानी मीडिया भी कट्टर ही दिखा


पंजाब प्रांत के राज्यपाल और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के कद्दावर तथा शोला बयान नेता सलमान तसीर को उनके अंगरक्षक मुमताज कादरी ने गोलियों से छलनी कर दिया। कहा जाता है कि उसने ये कृत्य इसलिए किया, क्योंकि तसीर ने पैगंबर-ए-इस्लाम की कथित बेइज्जती करने और मौत की सजा पाने वाली महिला आसिया मसीह का पक्ष लिया था और रिसालत कानून (जिसका संबंध हजरत मुहम्मद के रसूल होने से है) को काला कानून करार दिया था। इस घटना और उसके बाद के हालात पर नजर डालते हुए कुछ अखबारों की राय। दैनिक खबरें कहता है कि पाक के धार्मिक कट्टरपंथी अपने विरोधियों को रास्ते से हटाने से गुरेज नहीं करते। अफसोस ये कि जमायत अहले-सुन्नत पाकिस्तान के उलमा ने एलान किया था कि तासीर की नमाज-ए-जनाजा ही न पढ़ाई जाए। उन्होंने तसीर के कातिल को आशिक-ए-रसूल और गाजी (योद्धा) कह कर प्रशंसा की। कुछ वकीलों ने कादरी को अदालत में पेशी के समय फूलों से लाद दिया। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि ऐसे संगठनों और उसके सदस्य भी मतभेद को बातचीत से हल नहीं करना चाहते। उनके लिए, उनके द्वारा इस्लाम की जो व्याख्या की गई है वही सही है। ऐसे उलमा इस्लामी इतिहास को विकृत करके पेश कर रहे हैं। वो हजरत मुहम्मद और खलीफाओं के दौर की घटनाएं ऐसे पेश करते हैं कि लगता है गोया तब लोगों को व्यक्तिगत बेइज्जती करने पर कत्ल कर दिया जाता था। ये हमारे नबी (मुहम्मद) पर एक तुहमत है। उम्मत के अनुसार रसूल के अवतार लेने संबंधी कानून को काला कानून बताने पर राज्यपाल तसीर की हत्या हो गई। पीपुल्स पार्टी तथा अन्य संगठनों के कथित रोशन खयाल लोगों को गहरा धक्का लगा और पाक को एक सेक्युलर राज्य बनाने के उनके सपने चकनाचूर हो गए हैं। इसके साथ ही पंजाब सरकार में शामिल पीपीपी को नवाज शरीफ की ओर से पेश की गई मांगों का इंतजार है। हालांकि कराची के बिलावल हाउस में नए राज्यपाल के लिये इंटरव्यू चल रहे थे। लोगों को इस्लामाबाद और लाहौर से बुलाया गया था। इनमें शोला बयान बाबर एवान सबसे आगे थे, लेकिन बदले हालात में लतीफ खोसा की मध्यमार्गी शख्सियत भी ठीक लग रही है। इस्लामाबाद के जिन्ना अखबार ने लिखा है कि तसीर की हत्या के बाद पीपुल्स पार्टी और नवाज शरीफ की पार्टी के बीच नए राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर मतभेद गहरा सकते हैं। जरदारी वहां ऐसा गवर्नर नियुक्त करेंगे जो तसीर की ही तरह उनकी पार्टी को बढ़ावा दे, जबकि नवाज पार्टी का कहना है कि नए राज्यपाल की नियुक्ति पर उनसे सलाह लेनी चाहिए। तासीर अपने बयानों से नवाज पार्टी को मुसीबत में डाले रखते थे। फिर भी पंजाब के मुख्यमंत्री के अनुसार तसीर की मौजूदगी उनके लिए नुकसान के बजाए फायदे में थी। तसीर के चले जाने से पीपीपी का नुकसान होगा वहीं नवाज पार्टी को भी घाटा होगा। जंग लिखता है कि तासीर कहते थे कि वह अदालती कार्यवाही में दखल नहीं देना चाहते, पर वो कोशिश करेंगे कि आसिया को उस जुर्म की सजा न मिले जो उसने किया ही नहीं है। इस बयान की तीव्र प्रतिक्रिया हुई। इसके बाद ही एक महिला सांसद ने राष्ट्रीय असेंबली में तौहीन-ए-रसालत कानून में संशोधन का बिल पेश किया तो लगा कि सरकार इस कानून को बदलना चाहती है। उस महिला सदस्य का कहना था कि वो अपनी जिंदगी इस कानून के लिए न्योछावर कर सकती है लेकिन मेरा इस बिल को पेश करने का उद्देश्य इसके दुरुपयोग को रोकना था। औसाफ का कहना है कि तसीर के बयान को अनेक लोगों ने गैर जिम्मेदाराना करार दिया था। आसिया के खिलाफ रिपोर्ट लिखाने वाले इमाम का कहना था कि उसने गवाहों को कुरान शरीफ पर शपथ दिला कर प्रमाणित किया कि उस महिला ने रसालत की तौहीन की थी।



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