नई दिल्ली, एजेंसी : प्रख्यात लेखक सलमान रुश्दी का मानना है कि सऊदी अरब के पैसे की मदद से इस्लाम का कट्टर स्वरूप फैल रहा है। यहां तेल के बदले मिल रहे पैसों का इस्तेमाल ऐसे विचारों को फैलाने में किया जा रहा है जिससे कट्टर इस्लाम का नया रूप सामने आ रहा है। वह भारत में भी इस्लामी कट्टरता बढ़ती देख रहे हैं। उधर, ईरान ने रुश्दी की हत्या पर इनामी राशि को बढ़ाकर करीब 18 करोड़ कर दिया है। ईरानी फाउंडेशन का कहना है कि अगर रुश्दी को पहले मार दिया जाता तो आज इस्लाम विरोधी फिल्म नहीं बनती। अपनी नई किताब जोसेफ एंटन के प्रकाशित होने से पूर्व एक टीवी चैनल के साथ साक्षात्कार में रुश्दी ने कहा कि भारत में आजाद विचारों पर हमले चिंताजनक हैं। अपनी किताब को दिल्ली विश्र्वविद्यालय के सिलेबस में शामिल न किए जाने से भी वह काफी आहत हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें विदेशी लेखक बताकर उनकी किताब को सिलेबस में शामिल नहीं किया गया था। उन्होंने पूछा कि आखिर मेरे अंदर विदेशी खून कहां है? यह अपमानित करने वाला तर्क है। अपनी किताब द सैटेनिक वर्सेज पर भारत में प्रतिबंध पर उन्होंने कहा कि इसे बिना देखे ही प्रतिबंधित कर दिया गया था। उन्होंने दिल्ली विश्र्वविद्यालय में रामानुजम के रामायण पर निबंध और मुंबई विश्र्वविद्यालय में रोहिंटन मिस्त्री की किताब पर हुए हमले की ओर भी ध्यान दिलाया, जिन्हें बाद में दोनों जगहों पर सिलेबस से बाहर कर दिया गया था। असीम त्रिवेदी पर हमले को दुखद बताते हुए उन्होंने कहा कि उनका कार्टून कहीं से विवादित नहीं था। उनके मुताबिक आजादी के बाद भारतीय नेताओं पर कार्टूनों के जरिये काफी व्यंग्य किए गए, लेकिन वे नहीं सुधरे। उन्होंने हिंदू कट्टरवाद की ओर इशारा करते हुए एमएफ हुसैन की पेंटिंग का भी जिक्र किया। अपनी पुरस्कृत पुस्तक मिडनाइट चिल्ड्रेन पर मीरा नायर द्वारा बनाई गई इसी नाम से फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर न मिलने संबंधी एक सवाल पर रुश्दी ने कहा कि इस मामले में मीडिया कुछ ज्यादा ही आगे चल रहा है। उन्होंने विवादित इस्लाम विरोधी फिल्म को कचरा बताया, लेकिन यह भी कहा कि कचरे के नाम पर किसी की हत्या को जायज नहीं ठहराया जा सकता।
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